मक्का के गुण

Posted On अप्रैल 4, 2008

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ऋतु   आने   पर   भुट्टा  खाने  से  आमाशय  को  बल  मिलता  है। यह  रक्तवर्धक  है। ताज़ा  मक्का  के  भुट्टे  पानी  में  उबाल  कर  उस  पानी  को  छानकर  मिश्री  मिला  कर  पीने  से  पेशाब  की  जलन, गुर्दे  की  कमज़ोरी  दूर  हो  जाती  है। जिसे  यक्ष्मा  का  पूर्वरुप  हो  उसे  मक्का  की  रोटी  खानी  चाहिये।

ज्वार और बाजरा के गुण

Posted On अप्रैल 3, 2008

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ज्वार   बवासीर  और  घावों  में  लाभदायक  है। ज्वार  की  रोटी  नित्य  छाछ  में  भिगोकर  खाएँ। शरीर  बलवान  होता  है। भुनी  हुई  ज्वार  बतासों  के  साथ  खाने  से  पेट  की  जलन  ठीक  हो  जाती  है।
बाजरा    दस्तावर, गर्म,  श्लेश्मा,  बलगम  का  नाश  करने  वाला  है।

गेहूँ के गुण

Posted On अप्रैल 2, 2008

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गेहूँ   की   रोटी   अन्य   अन्नों   से   अच्छी   होती   है। गेहूँ   के   आटे   को   एक   घंटे  गौंद   कर   पड़ा   रखें, फिर   इसकी   रोटी   बना   कर   खाएँ। यह   रोटी   शीघ्र   पच   जाती   है। गेहूँ  उबालकर   गर्म-गर्म   पानी   से   सूजन   वाली   जगह   को   धोने   से   सूजन   कम   हो   जाती   है। हड्डी   टूटने   पर   १२ग्राम   गेहूँ   की   राख   इतने   ही   शहद   में   मिला   कर   चाटने   से   टूटी   हुई   हड्डियाँ   जुड़   जाती   हैं। कमर   और   जोड़ों   के   दर्द   में   भी   आराम   होता   है। रात   को   २५०ग्राम   पानी   में   १२ग्राम   गेहूँ   भिगो   दें। प्रातः  छान   कर   उस   पानी   में   २५ग्राम   मिश्री   मिलाकर   पीने   से   पेशाब   की   जलन   दूर   होती   है।

चावल और उसकी उपयोगिता

Posted On अप्रैल 1, 2008

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चावल   की   प्रकृति   शीतल   है। पेट   में   गर्मी   भरी   होने   पर   एवं    गर्मी   के   मौसम   में   नित्य   चावल   खाने   से   ठंडक   मिलती   है।  चावल   बनाने  के   पश्चात्   इसका   उबला   हुआ   पानी   जिसे   मांड   कहते   हैं,   फेंक   देते   है।   यह   दस्तों   के   लिये   लाभदायक   है।बच्चों   को   आधा   कप,  बड़ों   को   एक   कप   प्रति   घंटे   से   पिलाने   से   दस्त   बन्द   हो   जाते   है।चावल   अतिसार   या   पेचिश   के   रोगियों   के   लिये   उत्तम   खाद्य   पदार्थ   है। जिन   लोगों   के   गर्दे   में   पथरी   का   रोग   हो   उनके   लिये   चावल   बहुत   हानिकारक   है।  एक   भाग   चावल   और   दो   भाग   मूंग   की   दाल    की   खिचड़ी   में   घी   मिलाकर   खाने   से   कब्ज़   दूर   होती   है।  लम्बे   समय   तक   चावल   खाते   रहने   से   कोल्सट्रोल    कम   हो  जाता   है,  बढ़ता   नहीं   है।  रक्तचाप   भी   ठीक   रहता   है।सूर्योदय   से   पहले   उठकर   मुहँ   साफ   करककके   एक   चुटकी   कच्चे   चावल   मुँह   में   रखकर   पानी   से   निगल   लें।यह   क्रिया   यकृत   को   मज़बूत   करने   के   लिये  बड़ी  अच्छी   है।

प्रसन्न रहें, स्वस्थ रहें

Posted On मार्च 31, 2008

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स्वास्थ्य   प्राप्ति   एवं  स्वास्थ्य  रक्षा  के  लिये  संतुलित  भोजन,  विशुद्ध  जल,  शुद्ध  वायु,  उचित  निद्रा,  उचित  व्यायाम   तथा  संयमित  जीवन  व्यतीत  करना  नितान्त  आवश्यक  है। शरीर  में  किस  धातु  की  अधिक  न्यूनता  हुई  है  या  किस  धातु  की  कमी  हुई  है,  उसके  अनुसार  ही  हमें  भोजन  में  खाद्य  पदार्थों  को  चुनना  होता  है। यदि  हम  शुद्ध  सात्विक  भोजन,  भोजन  के  गुण-दोषों  को  जानकर  भोजन  करेंगे  तो  शरीर  स्वस्थ  रहेगा।खान-पान  का  चरित्र  पर  प्रभाव  पड़ता  है। संतुलित  भोजन  द्वारा  निरोग  रहने  के  अतिरिक्त  अनेकानेक  रोगों  का  उपचार  भी  किया  जा  सकता  हे। स्वास्थ्य   का  सम्बन्ध  उचित  पोषण  पर  निर्भर  करता  है।  मनुष्य  का  स्वभाव  है  कि  वह  हर  बीमारी  के  लिये  डाक्टर  के  पास  जाता  है, जहाँ  स्वास्थ्य  लाभ  की  कामना  होती  है  वहीं  औषधियों  के  दुष्प्रभाव,  चिकित्सा  में  खर्च  होने  वाली  कठोर  श्रम  और  पसीने  की  कमाई  का  अति  व्यय  होजाता  है।ऐसी  स्थिति  में  यदि  घरेलू  चिकित्सा  मिल  जाए  और  घर  में  बैठे  ही  औषधि   प्राप्ति  के  लिये  प्रयत्न  किये  बिना  ही  स्वयं  अपनी  चिकित्सा  कर  सकें,  इससे  बढ़कर  हितकारी  चिकित्सा  साधन  और  कोई  हो  नहीं  सकता। दैनिक  जीवन  में  काम  आने  वाले  प्रत्येक  पदार्थ  अन्न, फल,  शाक- सब्जी  आदि  की  उपयोगिता  एवं  जानकारी  हमारे  लिये  अत्यन्त  आवश्यक  है  जिसके  द्वारा  हम  प्रसन्न  एवं  स्वस्थ  रह  सकते  हैं। भविष्य  में  कभी  बीमार  ही  न  हो  इस  प्रकार  का  निर्णय हम  स्वयं  कर  सकते  है। मैं  आप  सभी  की  आरोग्यता  एवं  स्वाथ्य  रक्षा  के  लिये  ईशवर  से  प्रार्थना  करती  हूँ
                                                    उत्तम  स्वास्थ्य  कीमंगल  कामनाओं  के  साथ।

बैंगन के गुण

Posted On मार्च 31, 2008

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बैंगन   गर्म   और   खु़श्क   होता   है।  पेट   में   गैस   बनती   हो  तो   ताजा़   लम्बे   बैंगन   की   सब्जी   जब   तक   मौसम   में    बैंगन   रहे,   खाते   रहे। इससे   गैस   की   बीमारी   दूर   हो   जाएगी। बैंगन   ह्रदय   को   शक्ति   देता   है। किसी   भी   प्रकार   के   ज्वर   में   बैंगन   न   खाएँ।बवासीर   और   अनिद्रा   के   रोगी   बैंगन   न   खायें। बैंगन   लम्बे   समय   तक   सेवन   न   करें।

सिघांड़ा के गुण

Posted On मार्च 30, 2008

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सिंघाड़े   में   आयोडीन    अधिक   होता   है। गले   के   रोग,  टांस्सिल   आदि   में   इसे   खाना   चाहिये।  नींबू   के   रस   में   सूखे   सिंघाड़े  को   दाद   पर   घिसकर   लगाएँ। पहले   तो   कुछ   जलन   लगेगी,  फिर   ठंडक   पड़   जाएगी।  कुछ   दिन   इसे   लगाने   से   दाद   ठीक   हो   जाता   है। गर्भाश्य   की   निर्बलता   से   गर्भ   नहीं   ठहरता,  गर्भस्त्राव   हो   जाता   हो   तो   कुछ   सप्ताह   ताज़े   सिंघाड़े   खाने   से   लाभ   होता   है।  सिंघाड़े   की   रोटी   खाने   से   रक्त- प्रदर  ठीक   हो   जाता   है।

अरबी के गुण

Posted On मार्च 29, 2008

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अरबी ठंडी और तर होती है। गुर्दे के रोग अरबी खाने से दूर होते हैं। उच्च रक्त-चाप अरबी खाने से कम होता है। त्वचा का सूखापन और झुर्रियाँ भी अरबी दूर करती है। अरबी की सब्जी में दालचीनी, गरम मसाला और लौंगें डालें। जिनके गैस बनती हो, गठिया और खाँसी हो उनके लिये अरबी हानिकारक है। ह्रदय के रोगी को अरबी की सब्जी एक बार प्रतिदिन खाने से ह्रदय रोग में लाभ होता है।

पोदीना के गुण

Posted On मार्च 28, 2008

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पोदीना  का  लेटिन  नाम  मेन्था  स्पाइकेटा  है।  यह  गर्म  और  खुश्क  होता  है।  सूखा  पोदीना  और  चीनी  समान  मात्रा  में  मिलाकर  दो  चम्मच  की  फंकी  लेने  से  पेट  दर्द  ठीक  हो  जाता  है। उल्टी, दस्त, हैजा़  हो  तो  आधा  कप  पोदीने  का  रस  हर  दो  घंटे  से  पिलायें। हरा  पोदीना  पीसकर  चेहरे  पर  बीस  मिनट  तक  लगा  दें।यह  त्वचा  की  गर्मी  निकाल  देता  है। इससे  चेहरे  के  मुँहासे  मिट  जाएगे।चोट  आदि  लग  जाने  से  जमा  रक्त  पोदीने  का  अर्क  पीने  से  पिघल  जाता  है। हिचकी  न  बन्द  हो  रही  हो  तो पोदीने  के  पत्ते  चूसें। ज़काम,  खाँसी, दमाकफ  होने  पर  चौथाई  कप  पोदीने  का  रस  इतने  ही  पानी  में  मिलाकर  नित्य  तीन  बार  पीने  से  लाभ  होता  है।

सेम, तोरई, टिन्डा, परवल के गुण

Posted On मार्च 27, 2008

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सेम=====सेम  रक्तशोधक  है, फुर्ती  लाती  है, शरीर  मोटा  करती  है।
तोरई====तोरई   बवासीर   को   ठीक   करती   है।इसकी   सब्जी  खाएँ। क्योंकि   ये   कब्ज़   दूर   करती   है। पेशाब   की   जलन   को   तोरई   ठीक   करती   है   और   पेशाब   खुलकर   लाती   है।
टिन्डा===बीमारी   की   अवस्था   में   टिन्डे   की   सब्जी   खाना   लाभदायक   है।यह   शरीर   को   ताक़त   देता   है   और   मोटा   बनाता   है।उच्च   रक्तचाप   को   टिन्डा   कम   करता   है।हल्के   बुखा़र   को   यह   ठीक   कर   देता   है।
परवल===परवल   का   साग   खुजली, कोढ़,रक्तविकार, आँखों   की   बीमारियाँ  और  कृमिनाशक   है।पुराने   बुखार   में   यह   अधिक   लाभदायक   है।

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