होलिकोत्सव

Posted On मार्च 20, 2008

Filed under Uncategorized

Comments Dropped 3 responses

भारतीय  उत्सव  केवल  आमोद- प्रमोद  के  ही  साधन  नहीं  हैं  बल्कि  उसमें  धर्म-परायण  भारतीयों  की  धार्मिकता  और  वैज्ञानिकता  की  पुट  लगी  हुई  है। होली  बसंत  का  उल्लासमय  पर्व  है। इसे ” बसन्त  का  यौवन”  कहा  जाता  है। प्रकृति  सरसों  के  फूलों  की  पीली  साड़ी  पहन  कर  किसी  की  बाट  जोहती  हुई  प्रतीत  होती  है। हमारे  पूर्वजों  ने  होली  को  आपसी  प्रेम  का  प्रतीक  माना  है। इसमें  छोटे बड़े  सभी को  आपस  में  मिलकर  पुराने  भेदभावों  को  मिटा  देना  चाहिये। होली  रंग  का  त्यौहार  है।यह  हमें  हमेशा  प्रसन्न  रहने  की  प्रेरणा  देता  है। इससे  हमारे  अन्दर  यह भावना  विकसित  होती  है  कि  हम  ह्रदय  से  विशाल  बनें।  “सब  समान  हैं”  की  गूंज  चारों  दिशाओं  में  गूंजती  प्रतीत  होती  है। होली  प्रकृति की  सहचरी  है। शीतकाल  की  समाप्ति  और  ग्रीष्मकाल  के  आरम्भ,  इन  दो ऋतुओं  को  मिलाने  वाला  संधिकाल  का  पर्व  होली  है।  खेती  पककर  तैयार  होने  लगती  है। वास्तव  में  होली  का  त्यौहार  तो  बड़ा  ऊँचा  दृष्टिकोण  लेकर  प्रचलित  किया  गया  था।  आज  कुछ  लोगों  ने  इसका  रुप  बिगाड़  कर  रख  दिया  है।  प्रेम  और  आनन्द  के  त्यौहार  को  घृणा  और  दुश्मनी  का  त्यौहार  बना  दिया जाता  है।  इस  पर्व  के  पवित्र  अवसर  पर  हमें  ईर्ष्या,  द्वेष,  कलह  आदि  बुराईयों  को  दूर  भगाना  चाहिये।  छोटे  बज़़ों  को  गले  लगाकर  एकता  का  उदाहरण  प्रस्तुत  करना  चाहिये।   होली  का  त्यौहार  मनाना  तभी  सार्थक  होगा  यदिहम  इसके  वास्तविक  महत्व  को  समझकर  उसके  अनुसार  आचरण  करें।
   फाल्गुन  की  पूर्णिमा को  होली  मनाई  जाती  है। धूलैडी  की  आप  सभी  को  मंगलकामनाएँ। इस  दिन  मिलने  के  बाद  साल  भर  के  सब  बैर  अपने  दिल  से  निकाल  दीजिएगा और  सभी  से  प्यार  से    मिलिएगा।

3 Responses to “होलिकोत्सव”

  1. paramjitbali

    बहुत सुन्दर विचार प्रेषित किए हैं।होली मुबारक।

  2. choupal

    होली के इस पावन पर्व पर हम सब‍ मिलकर गिले शिकवे भूलाकर पुन:प्रेम और सदाचार की गंगा बहाएं । मेरी यही कामना है । आपके सुन्‍दर और सकारात्‍मक विचार के लिए साधुवाद ।

    कृष्‍ण शंकर सोनाने

  3. mehhekk

    bahut gehri sundar baat,holi ki badhai aap kobhi.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s