बसन्त ऋतु

Posted On फ़रवरी 3, 2008

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भारत  अपनी  प्राकृतिक  शोभा  के  लिये  विश्व  विख्यात  है।  इसे  ऋतुओं  का  देश  कहा  जाता  है।ऋतु-  परिवर्तन   का   जो  सुन्दर  क्रम  हमारे  देश  में  है,  वह  अन्यत्र  दुर्लभ  है।बसन्त  ऋतु  की  शोभा  सबसे  निराली  है।  बसन्त  ऋतु  को  ऋतुराज  कहते  हैं क्योंकि  यह  ऋतु  सबसे  सुहावनी,  अद्भुत,  आकर्षक  और  मन  में  उमंग  भर  देने  वाली है।  सचमुच  बसन्त  की  बासन्ती  दुनिया  की  शोभा  ही  निराली  होती  है।  यह  ऋतु  प्रकृति  के  लिये  वरदान  बनकर  आती  है। प्रकृति  में  सर्वत्र  यौवन  के  दर्शन  होते  हैं।  सारा  वातावरण  सुवासित  हो  उठता  है। चम्पा,  माधवी,गुलाब,  चमेली आदि  की  सुन्दरता  मन  को  मोह  लेती  है। कोयल  की  ध्वनि  कानों  में  मिश्री  घोलती  है।  बसन्त  का  आगमन  मनुष्य  जगत  में  भी विशेष  उल्लास  एवं  उमंगों  का  संचार  करता  है।  कवि  एवं  कलाकार  इस  ऋतु से  विशेष  प्रभावित  होते  हैं।  उनकी  कल्पना  सजग  हो  उठती  है।  इस  ऋतु  एक  बड़ी  विशेषता  यह  है  कि  इन  दिनों  शरीर  में  नए  रक्त  का  संचार  होता  है।आहार- विहार  अगर  ठीक  रखा  जाए तो  स्वास्थ्य  की  उन्नति  होती  है। इस  ऋतु में  मीठी  और  तली  वस्तुएं  कम  ख़ानी  चसहिये। चटनी, कांजी, खटाई  आदि का  उपयोग  लाभदायक  है। इस  ऋतु  को  मधु  ऋतु  भी  कहा  गया  है। भगवान  श्रीकृष्ण  ने  गीता  में  कहा  है  कि  मैं  ऋतुओं  में  बसन्त  हूँ।   यह  ऋतु  केवल  प्राकृतिक  आन्नद  का  ही  स्रोत  नहीं  बल्कि  सामाजिक  आन्नद  का  भी  स्रोत  है।
‘बसन्त  भ्रमणं पथ्यम्’  अर्थात्  बसन्त  में  भ्रमण  करना  पथ्य  है।

2 Responses to “बसन्त ऋतु”

  1. anuradha srivastav

    रोचक………..

  2. Suresh Agrawal

    Lekh samanya parantu upayogi laga.Dhanyawad.
    Saadar
    Suresh Agrawal
    Kesinga(Orissa)

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