अध्यनन का आन्नद

Posted On मई 25, 2007

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आन्नद प्राप्त करना मानव जीवन का लक्ष्य है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार आन्नद प्राप्त करने का प्रयत्न करता है। किसी को ये खेल-तमाशे से प्राप्त होता है तो किसी को पुस्तकों के अध्यनन से। अध्यनन से प्राप्त होने वाला आन्नद सच्चा तथा स्थायी आन्नद है। ये आन्नद मानव मन का आन्नद है। मानसिक आन्नद ही दिव्य आन्नद है। तभी तो रस को काव्य की आत्मा कहा गया है। यह रस अध्यनन द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। उत्तम पुस्तक चिन्तामणि के समान है। पुस्तकें मनुष्य को लौकिक दुख़ों एवं चिन्ताओं से मुक्त रखती है। ये हम सबमें आशा,धैर्य तथा उत्साह का संचार करती हैं। क्ष्रेष्ठ पुस्तकों कि दुनिया स्वर्ग लोक के समान है। उत्तम से उत्तम मित्र तो धोख़ा दे सकता है पर अच्छी पुस्तक सुमार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा देती है। जिसने अध्यनन का आन्नद प्राप्त कर लिया उसे संसार का कोई भी सुख उतना आन्नद प्रदान नहीं कर सकता। पुस्तकें हमारी मानसिक भूख़ को शांत करती हैं। ये आत्मिक आनन्द के झूले में झूलातीहैं।
                                       धन्यवाद।

One Response to “अध्यनन का आन्नद”

  1. अभिनव

    सही जवाब।

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