सत्य विचार

Posted On मई 23, 2007

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Comments Dropped 2 responses

१- सच्ची बात अच्छी नहीं लगती और अच्छी लगने वाली बात कभी सच्ची नहीं होती।
२- अच्छाई कभी झगड़ा नहीं कराती और झगड़ा कभी अच्छा नहीं होता।।
३- बुद्धिमान कभी ज्यादा बकवाश नहीं करते और ज्यादा बकवाश करने वाले कभी बुद्धिवान नहीं होते।
४- आलस्य अभावों और कष्टों का पिता है, आलस्य में जीवन बिताना आत्महत्या के समान है।
                                                                                     धन्यवाद।

2 Responses to “सत्य विचार”

  1. सागर चन्द नाहर

    मैं भी ज्यादा बकवास नहीं करता सुषमाजी। हाँ थोड़ा आलसी जरूर हूँ।🙂

  2. divyabh

    आपके विचार जरुर सोचनीय है किंतु मुझे लगता है की आप कुछ नया भी अच्छा लिख सकती है तो थोड़ा कुछ नया भी पेश करें…।

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