कम्प्यूटर- आज की आवश्यकता

Posted On मई 16, 2007

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कम्प्यूटर को लेकर साधारण पढ़े लिखे व्यक्ति से लेकर उच्च शिक्षित वर्ग के व्यक्ति के मन में भी जिज्ञासा है कि क्या भविष्य में कम्प्यूटर मानव मस्तिष्क का पूरी तरह स्थान ले लेगा? क्या मनुष्य की सारी चिन्तन प्रक्रियायें कम्प्यूटर सम्पादित करने लगेगा? क्या भविष्य का मनुष्य हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा और उसके मस्तिष्क को जंग लग जायेगा?
                    सोचकर समस्या सुलझाने वाला पहला कम्प्यूटर कार्यक्रम १९५६ से लाँजिक थियिस्ट कहलाया। यह कम्प्यूटर कुछ तथ्यों का चुनाव उसमें तार्किक  परिवर्तन करके कुछ गणनात्मक सिद्धान्तों को प्रतिपादित करता था।
बोरिस नामक कम्प्यूटर को कहानी पढ़ने और समझने की योग्यता प्राप्त है।
          कम्प्यूटर का उपयोग- प्रयोग विभिन्न वैज्ञानिक और व्यापारिक प्रक्रियाओं में कितना ही क्यों न बढ़ जाए, किन्तु वह कभी भी मानव मस्तिष्क का स्थान नहीं ले पाएगा क्योंकि वह केवल वे ही परिणाम और सूचनाएं देता है जिसका मसौदा ध्यानपूर्वक उसमें भरा होता है। मानव मस्तिष्क में चेतना, ज्ञान, इच्छा और कार्य की जो क्ष्रंखला  है, उसे पाना कम्प्यूटर के बस की बात नहीं है। कम्प्यूटर मानव मस्तिष्क की तरह अनुभूति जन्य काव्य सृष्टि नहीं कर सकता, सौंदर्य से सम्पादित नहीं हो सकता और अपनों के सामीप्य से द्रवित और कोमल नहीं हो सकता।
                                                                                          धन्यवाद।    

2 Responses to “कम्प्यूटर- आज की आवश्यकता”

  1. paramjitbali

    सही बात है भाई, कम्प्यूटर का उपयोग- प्रयोग आज जरूरत तो बन गया है लेकिन यह इंसानी दिमाग ,उस की भावनाओं का, मुकाबला कभी नही कर पाएगा।मानव को खुदा ने बनाया है और कम्प्यूटर को इंसान ने।मानव, खुदा के बराबर नही हो सकता और कम्प्यूटर, इंसान के।

  2. हरिराम

    बड़े बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में ‘वेदिक गणित’ पढ़ाया जाता है, जिसके सूत्र तीव्रतम सुपर कम्प्यूटर से भी जल्दी हिसाब कर दिखाते हैं।

    ज्योतिष के फलित हेतु कम्प्यूटरों के सहारे अनेक प्रोग्राम विकसित किए जा रहे हैं, किन्तु कोई भी सही परिणाम नहीं दे पाता, जितना कि एक ज्योतिषी अपने विचार-सागर, चिन्तन, व गुणों की गणना, निर्णय से दे पाता है।

    कम्प्यूटर का मूलाधार सिर्फ द्विघात है अर्थात् 0 या 1, हाँ या नहीं, अर्थात् बिट। अर्थात् द्विआयामी। जबकि मानव मस्तिष्क बहुआयामी है।

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