Posted On अप्रैल 23, 2007

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विकलांग भी देश का अंग है।
                          मनुष्य इस  संसार का सर्वक्षेष्ट प्राणी माना जाता है। अपनी सार्मथ्य से  अथवा अपनी शकित् के सदुपयोग से वह दूसरों के अभाव को दूर कर सकता है। वह अपने मानवीय गणों तथा परोपकारी वृति के माध्यम से दूसरों में आत्मविश्वास जगाकर उनकी हीनभावना को दूर कर सकता है। विकलांग भी हमारे समाज का अंग है। उनकी सहायता करना हमारा परम कर्तव्य है।
                         विकलांग एक सामान्य मानव के समान काम नहीं कर सकता। इनमें से कुछ विकलांग ऐसे होते हैं, जिनका इलाज सम्भव होता है। ऐसे व्यक्तियों का इलाज कराने के लिये हम धन आदि देकर उनकी सहायता कर सकते हैं। भारत में विकलांगता का प्रधान कारण निर्धनता है। जन्म के उपरान्त कुपोषण के कारणबहुत से बच्चे अन्धेपन तथा पोलियो का शिकार हो जाते हैं। हमारे देश के लोगों में सभ्यता और शिष्टाचार का अभाव है। विकलांगों को उपेक्षा तथा घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। इससे विकलांग हीनभावना का शिकार होते हैं। उनमें निराशा फैल जाती है। इस तरह का दृष्टिकोण विकलांग के लिये अभिशाप बन जाता है। हमारा कर्तव्य है कि हम उनमें आत्मविश्वास जगायें, उनके पुर्नवास के लिये प्रयत्नशील रहें। उन्हें अनुभव कराया जाऍ कि वे भी मतदान करके राष्टृ के निर्माण में सहायक बन सकते हैं। वे भी अपनी उपलब्धियों का पुरुस्कार पाने के अधिकारी हैं। कुछ कार्यश्वे्त्र ऎसे भी हैं,जिनमें विकलांग स्वस्थ व्यक्तियों से भी अधिक सफल होते हैं। संयुक्त राष्टृ संघ के तत्वाधान में १९८१ के वर्ष को ‘विकलांग कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा चुका है। भारत सरकार भी विकलांगों की दशा सुधारने में प्रयत्नशील है। हमें ये स्वीकार करना होगा कि विकलांग भी देश का अंग हैं।                 धन्यवाद।
                    
 
 

One Response to “”

  1. Mohinder Kumar

    आप के विचारो से सहमत हूं मैं..

    असल में विकलांग वो लोग हैं, जिन के दिल में दर्द नहीं, दूसरों के लिये प्यार और सम्मान नहीं..

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