लहसुन और उसके गुण

Posted On March 26, 2008

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लहसुन  खाने  से  भूख  अच्छी  लगती  है। शरीर  में  गर्मी, चेहरे  पर  चमक  आती  है। कृमि  नष्ट  होते  हैं। इसे  नित्य  खाने  से  रोगों  से  बचाव  होता  है। लहसुन  उत्तेजक  और  चर्मदाहक  होता  है।  लहसुन  का प्रभाव सारे  शरीर  पर  होता  है।यह  रक्त, ताकत  और  वीर्य  बढ़ाने  वाला  है। यह  अधिक  पेशाब  लाता  है, पेट  के  अफारे  को  दूर  करता  है। यह  जोड़ों  का  दर्द, सूजन, पक्षाघात, तिल्ली  में  लाभदायक है।रोग  के  किटाणुओं  का  नाश  करता  है।गला  बैठने  पर  गर्म  जल  में  लहसुन  का  रस  मिलाकर  गरारे  करें।इससे  सीने  का  दर्द  कम  होता  है।लहसुन  में  एल्लीसिन  नामक  पदार्थ  पाया  जाता  है जो  किटाणुओं  को  नष्ट  करता  है।, जो  पेनीसिलीन  से  नष्ट  नहीं  होते। 

प्याज़ और उसके गुण

Posted On March 26, 2008

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प्याज़  का  लेटिन  नाम  ऐलियम  सीपा  है। प्याज़  गरीबों  की  कस्तूरी  है। यदि  नींद  न  आती  हो  तो  कच्चा  लाल  प्याज़  का  रस  चार  चम्मच  पीयें, इससे  नींद  अच्छी  आएगी। इसके  निरन्तर  प्रयोग  से  नेत्रों  की  दृष्टि  बढ़  जाती  है। मस्सों  पर  प्याज़  का  रस  लगाने  से  मस्से  नष्ट  हो  जाते  हैं। तीन  औंस  प्याज़  का  रस  प्रातः  थोढ़ा  सा  पानी  मिलाकर  पीने  से  मिरगी  आना  बन्द  हो  जाता  है। यह  कम  से  कम  ४०  दिन  दें।गर्मी  में  प्याज़  दो  बार  खाने  से और  पास  रखने  से  लू  नहीं  लगती।एक  कच्चा  प्याज़  नित्य  भोजन  के  साथ  खाने  से  कब्ज़  ठीक  हो  जाती  है।

आलू और उसके गुण

Posted On March 25, 2008

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आलू  शुष्क  और  गर्म  होता  है। यह  रोटी  से  जल्दी  पचता  है। यह  सम्पूर्ण  आहार  है। आलू  में  कैल्शियम, लोहा, विटामिन बी  तथा  फासफोरस  बहुतायत  में  होता  है। आलू  खाते  रहने  से  रक्तवाहिनियाँबड़ी  आयु  तक  लचकदार  बनी  रहती  हैं  तथा  कठोर  नहीं  होने  पाती।  इसलिये  आलू  खाकरलम्बी  आयु  प्राप्त  की  जा  सकती  है। कभी-कभी  चोट  लगने  पर  नील  पड़  जाती  है।  नील  पड़ी  जगह  पर  कच्चा आलू  पीसकर  लगायैं।   आलू  में  पोटेशियम  साल्ट  होता  है जो  अल्पपित्त  को  रोकता  है। एक  या  दोनों  गुर्दों  में  पथरी  होने  पर  केवल  आलू  खाते  रहने  पर  लाभ  होता  है।पथरी  के  रोगी  को  केवल  आलू  खिलाकर  और  बार-बार  अधिक  पानी  पिलाते  रहने  से  गुर्दे  की  पथरियाँ  आसानी  से  निकल  जाती  है।

ककड़ी और उसके गुण

Posted On March 24, 2008

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ककड़ी   भारी   और   पेट   में   गैस   पैदा   करने   वाली  है। पायोरिया में  ककड़ी   का  रस  पीने  से  लाभ  होता  है। ककड़ी  में  पोटेशियम  तत्व  बहुत  मिलते  हैं।  ककड़ी  का  रस  उच्च एवं  निम्न,  दोनों  रक्तचापों  में  पीना  लाभदायक  है। ककड़ी  छिलके  सहित  कच्ची  ही  खानी  चाहिये। ककड़ी  पर  नमक  न  डाले। ककड़ी  खाने  से  पाचन  क्रिया  ठीक  रहती  है। चेहरे  की  त्वचा  चिकनी  हो  तो  ककड़ी  रगड़े  फिर  पानी  से  धोयें।  चेहरे  की  चिकनाई  दूर  हो  जाएगी।

जमीकन्द और उसके गुण

Posted On March 23, 2008

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जमीकन्द गर्म और शीतल होता है। जमीकन्द की सब्जी में कम मसाले डालकर खाने से लाभ होता है।चावल और इमली के पत्तों के साथ जमीकन्द की सब्जी बना कर खाने से लाभ होता है। दाद, खुजली, कोढ़ भी इसकी सब्जी खाने से ठीक हो जाते है। निरन्तर लम्बे समय तक इसकी सब्जी खानी चाहिये।

होली शुभ हो

Posted On March 21, 2008

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सांस्कृतिक   पर्व  होली  आप  सभी  के  लिये  नई-नई  उमंगों  से  भरा  हो। प्रेम-परिहास  और  आनन्द  के  इस  मधुर  पर्व  पर  कुछ  असामाजिक  व्यक्ति  मदिरापान  का  अभद्र   प्रदर्शन  करते  हैं। किसी  पर  कीचड़,  तारकोल  और  गोबर  फंकते  हैं।  यह  कुरीति  निंदनीय  होने  के  कारण  त्याज्या  है। भाईचारा, आस्तिकता  तथा  प्रेम-मिलन  का  प्रतीक  यह  त्यौहार  हमें  प्रेमपूर्वक  ही  मनाना  चाहिये। आशा  करती  हूँ  कि  आप  सभी  इस  बात  पर  अमल  करेंगे।
                ऐरी   इन   नैनन   के   नीर   में   अबीर   घोरि।
                बोरि   पिचकारी  चित्तचोर   पै  चलाई  आउं।।
           जन-जन  के  ह्रदय   में  उल्लासपर्व  होली  के  अवसर  पर  एक-दूसरे  को  रंग  से  सराबोर  कर  देने  की  इच्छा  जागृत  होती  है। ईश्वर  से   प्रार्थना  है  कि  रमग-बिरंगे  इस  पर्व पर  आप  सभी  को  तरक्की-तंदरुस्ती  मिले।  

होलिकोत्सव

Posted On March 20, 2008

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भारतीय  उत्सव  केवल  आमोद- प्रमोद  के  ही  साधन  नहीं  हैं  बल्कि  उसमें  धर्म-परायण  भारतीयों  की  धार्मिकता  और  वैज्ञानिकता  की  पुट  लगी  हुई  है। होली  बसंत  का  उल्लासमय  पर्व  है। इसे ” बसन्त  का  यौवन”  कहा  जाता  है। प्रकृति  सरसों  के  फूलों  की  पीली  साड़ी  पहन  कर  किसी  की  बाट  जोहती  हुई  प्रतीत  होती  है। हमारे  पूर्वजों  ने  होली  को  आपसी  प्रेम  का  प्रतीक  माना  है। इसमें  छोटे बड़े  सभी को  आपस  में  मिलकर  पुराने  भेदभावों  को  मिटा  देना  चाहिये। होली  रंग  का  त्यौहार  है।यह  हमें  हमेशा  प्रसन्न  रहने  की  प्रेरणा  देता  है। इससे  हमारे  अन्दर  यह भावना  विकसित  होती  है  कि  हम  ह्रदय  से  विशाल  बनें।  “सब  समान  हैं”  की  गूंज  चारों  दिशाओं  में  गूंजती  प्रतीत  होती  है। होली  प्रकृति की  सहचरी  है। शीतकाल  की  समाप्ति  और  ग्रीष्मकाल  के  आरम्भ,  इन  दो ऋतुओं  को  मिलाने  वाला  संधिकाल  का  पर्व  होली  है।  खेती  पककर  तैयार  होने  लगती  है। वास्तव  में  होली  का  त्यौहार  तो  बड़ा  ऊँचा  दृष्टिकोण  लेकर  प्रचलित  किया  गया  था।  आज  कुछ  लोगों  ने  इसका  रुप  बिगाड़  कर  रख  दिया  है।  प्रेम  और  आनन्द  के  त्यौहार  को  घृणा  और  दुश्मनी  का  त्यौहार  बना  दिया जाता  है।  इस  पर्व  के  पवित्र  अवसर  पर  हमें  ईर्ष्या,  द्वेष,  कलह  आदि  बुराईयों  को  दूर  भगाना  चाहिये।  छोटे  बज़़ों  को  गले  लगाकर  एकता  का  उदाहरण  प्रस्तुत  करना  चाहिये।   होली  का  त्यौहार  मनाना  तभी  सार्थक  होगा  यदिहम  इसके  वास्तविक  महत्व  को  समझकर  उसके  अनुसार  आचरण  करें।
   फाल्गुन  की  पूर्णिमा को  होली  मनाई  जाती  है। धूलैडी  की  आप  सभी  को  मंगलकामनाएँ। इस  दिन  मिलने  के  बाद  साल  भर  के  सब  बैर  अपने  दिल  से  निकाल  दीजिएगा और  सभी  से  प्यार  से    मिलिएगा।

चुकन्दर और घरेलू उपचार

Posted On March 19, 2008

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चुकन्दर   रक्त   बढ़ाता   है; जोड़ों  का  दर्द  दूर  करता  है; यकृत  को  शक्ति  देता  है।मस्तिष्क  को  ताज़ा  रखता  है।यह  गुर्दे  के  रोगों  में  लाभदायक  है। गाजर  के  रस  में  चुकन्दर  का  रस  मिलाकर  पिलाने  से  स्त्रियों  सम्बंधी  रोग  ठीक  हो  जाते  है।चुकन्दर  के  पत्तों  को  उबाल  कर  सिर  धोने  से  फरास  दूर  होती  है।यह  पेशाब  ज्यादा  लाता  है। इसका  लगातार  सेवन  करने से  पथरी  गलकर  निकल  जाती  है।

खीरा के गुण

Posted On March 18, 2008

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खीरा   कब्ज़   दूर   करता   है। पीलिया,  प्यास,  ज्वर,  शरीर   की   जलन,  गर्मी   के   सारे   दोष, चर्म   रोग   में    लाभदायक   है। खीरा   भारी   और   पेट   में   गैस    पैदा   करने   वाला   है।  खीरे   का   रस   पथरी    में   लाभदायक   है। पेशाब   में   जलन,  रुकावट  और  मधुमेह   में   भी   लाभदायक   है।घुटनों   में   दर्द   को   दूर   करने   के   लिये   भोजन   में   खीरा   अधिक   खायें।

सब्ज़ियों द्वारा घरेलू उपचार==

Posted On March 17, 2008

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टमाटर—–   टमाटर  सुडौल  और  जितना  मोटा  हो,  उतना  ही  अच्छा  होता  है।  टमाटर  प्रातःभूखे  पेट  खाना  अच्छा  रहता  है। टमाटर  में  विटामिन ए,बी, सी  इतनी  अधिक  मात्रा  में  मिलते  हैं  जितने  संतरा  और  अंगूर  में  नहीं  मिलते। दाँतों  एवँ  हड्डियों  की  कमज़ोरी  दूर  करने  के  लिये  टमाटर  का  सेवन  ज़रुरी  है। नित्य  ५०ग्राम  कच्चा  टमाटर  खाने  से  कब्ज़  दूर  होती  है। टमाटर  के  रस  का  एक  गिलास  नित्य  पीने  से  पीलिया  ठीक  हो  जाता  है। यह  गर्मी  दूर  करता  है। रतौंधी (अल्प  दृष्टि )  में  टमाटर  लाभदायक  है। टमाटर  का  सेवन  बच्चों  के  सूखा  रोग  में  लाभदायक  है। टमाटर  खाने  के  बाद  पानी  न  पीयें। पथरी  के  रोगी  को  टमाटर  का  सेवन  नहीं  करना  चाहिये।  टमाटर  के  साथ  शक्कर  का  प्रयोग  लाभकारी  है।

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