चावल और उसकी उपयोगिता
April 1, 2008
चावल की प्रकृति शीतल है। पेट में गर्मी भरी होने पर एवं गर्मी के मौसम में नित्य चावल खाने से ठंडक मिलती है। चावल बनाने के पश्चात् इसका उबला हुआ पानी जिसे मांड कहते हैं, फेंक देते है। यह दस्तों के लिये लाभदायक है।बच्चों को आधा कप, बड़ों को एक कप प्रति घंटे से पिलाने से दस्त बन्द हो जाते है।चावल अतिसार या पेचिश के रोगियों के लिये उत्तम खाद्य पदार्थ है। जिन लोगों के गर्दे में पथरी का रोग हो उनके लिये चावल बहुत हानिकारक है। एक भाग चावल और दो भाग मूंग की दाल की खिचड़ी में घी मिलाकर खाने से कब्ज़ दूर होती है। लम्बे समय तक चावल खाते रहने से कोल्सट्रोल कम हो जाता है, बढ़ता नहीं है। रक्तचाप भी ठीक रहता है।सूर्योदय से पहले उठकर मुहँ साफ करककके एक चुटकी कच्चे चावल मुँह में रखकर पानी से निगल लें।यह क्रिया यकृत को मज़बूत करने के लिये बड़ी अच्छी है।