प्रसन्न रहें, स्वस्थ रहें
March 31, 2008
स्वास्थ्य प्राप्ति एवं स्वास्थ्य रक्षा के लिये संतुलित भोजन, विशुद्ध जल, शुद्ध वायु, उचित निद्रा, उचित व्यायाम तथा संयमित जीवन व्यतीत करना नितान्त आवश्यक है। शरीर में किस धातु की अधिक न्यूनता हुई है या किस धातु की कमी हुई है, उसके अनुसार ही हमें भोजन में खाद्य पदार्थों को चुनना होता है। यदि हम शुद्ध सात्विक भोजन, भोजन के गुण-दोषों को जानकर भोजन करेंगे तो शरीर स्वस्थ रहेगा।खान-पान का चरित्र पर प्रभाव पड़ता है। संतुलित भोजन द्वारा निरोग रहने के अतिरिक्त अनेकानेक रोगों का उपचार भी किया जा सकता हे। स्वास्थ्य का सम्बन्ध उचित पोषण पर निर्भर करता है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह हर बीमारी के लिये डाक्टर के पास जाता है, जहाँ स्वास्थ्य लाभ की कामना होती है वहीं औषधियों के दुष्प्रभाव, चिकित्सा में खर्च होने वाली कठोर श्रम और पसीने की कमाई का अति व्यय होजाता है।ऐसी स्थिति में यदि घरेलू चिकित्सा मिल जाए और घर में बैठे ही औषधि प्राप्ति के लिये प्रयत्न किये बिना ही स्वयं अपनी चिकित्सा कर सकें, इससे बढ़कर हितकारी चिकित्सा साधन और कोई हो नहीं सकता। दैनिक जीवन में काम आने वाले प्रत्येक पदार्थ अन्न, फल, शाक- सब्जी आदि की उपयोगिता एवं जानकारी हमारे लिये अत्यन्त आवश्यक है जिसके द्वारा हम प्रसन्न एवं स्वस्थ रह सकते हैं। भविष्य में कभी बीमार ही न हो इस प्रकार का निर्णय हम स्वयं कर सकते है। मैं आप सभी की आरोग्यता एवं स्वाथ्य रक्षा के लिये ईशवर से प्रार्थना करती हूँ
उत्तम स्वास्थ्य कीमंगल कामनाओं के साथ।