सत्यविचार
१- दुख़ औषधियां हैं, सुख़ रोग है क्योंकि दुख़ आदमी को नम्र करते हैं और सुख़ उसे अभिमानी बनाते हैं।
२- जिसको सन्तोष नहीं, वे धनवान भी निर्धन हैं
३- जीवन का पौधा प्रेम के पानी से हरा भरा रहता है।
४- दुनिया में हमेशा विद्धार्थी बन कर रहो, जो शिक्षक बना, वह विद्या के आन्नद से वंचित रहा।
५- चेहरे को हंसमुख़ रखो। हंसमुख़ चेहरे से वे पदार्थ ख़रीदे जा सकते हैं जो असंख्य धन से भी नहीं मिलते।
धन्यवाद।
May 15, 2007
यह विचार भी सराहनीय है…सुख तो मानव को कमजोर बनाता है और स्थिर कर देता है रास्ता तो दु:ख की नगरी से ही होकर गुजरता है…।